इस चोरी की वारदात ने पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज चंबा की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनका तर्क है कि इतने बड़े संस्थान में, जहाँ चौबीस घंटे सुरक्षाकर्मी तैनात होने का दावा किया जाता है, वहां कोई बाहरी व्यक्ति वार्डों में घुसकर इतनी बड़ी चोरी कैसे कर सकता है? तीमारदारों का कहना है कि बीमारी की हालत में वैसे ही इंसान मानसिक रूप से परेशान रहता है, ऊपर से ऐसी घटनाएं अतिरिक्त तनाव का कारण बन रही हैं। अस्पताल की लचर निगरानी और ढीली सुरक्षा व्यवस्था अब चर्चा का विषय बनी हुई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन सक्रिय हो गया है। पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज चंबा के सीएमओ डॉ. जालम भारद्वाज ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि उन्हें मोबाइल चोरी होने की शिकायत मिली है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को बारीकी से खंगाला जा रहा है ताकि चोरों की पहचान की जा सके और उन्हें जल्द से जल्द कानून के शिकंजे में लाया जाए। प्रशासन ने पुलिस को भी इस बारे में सूचित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सीएमओ ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में वार्डों में गश्त बढ़ाई जाएगी ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
मरीजों और चंबा के नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है। पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज चंबा जैसे संवेदनशील संस्थान में एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर कड़ी निगरानी होनी चाहिए। लोगों का मानना है कि रात के समय वार्डों में अनाधिकृत व्यक्तियों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए। फिलहाल, इस घटना के बाद अस्पताल में भर्ती अन्य मरीज भी अपने कीमती सामान को लेकर चौकन्ने हो गए हैं। अब देखना यह होगा कि सीसीटीवी फुटेज से चोर का सुराग कब तक लग पाता है और क्या मरीजों को उनके फोन वापस मिल पाएंगे।